अपने हृदय के
अपने हृदय के सारे द्वार खोल,
प्रेमदायिनी माँ की हो कृपा अनमोल
अपने हृदय के सारे द्वार खोल (कोरस)
प्रेमदायिनी माँ की हो कृपा अनमोल (३)
निर्मल माँ को जिसने जाना,
उसका ही हित होने वाला (३)
जीवन में अमृत रस घोल,
प्रेम दायिनी माँ की हो कृपा अनमोल
जाग बाँवरे खुद को जान (२)
अपनी ही शक्ति पहचान
जागृत करके वो पथ खोल,
निरानंद निरानंद झरे अनमोल (२)
सोई आत्मा में स्वानंद जागा
ब्रह्मानंद का राग समाया (२)
लीलानंद में जीवन तोल ।
निरानंद निरानंद झरे अनमोल (२)



