Friday, May 8, 2026
DIVINE SAHAJYOG
  • HOME
  • BLOGS
  • CHAKRAS AND CHANNELS
  • NIRMAL VIDYA MANTRA
  • SAHAJA YOGA TREATMENTS
  • MY EXPERIENCE WITH SAHAJA YOGA
  • NIRMALA VIDYA
  • SHRI MATAJI PHOTOS
  • SAHAJAYOGA HINDI
  • SAHAJI POEMS COLLECTION
  • SAHAJA YOGA ARTICAL
  • WEB STORIES
  • ABOUT US
  • CONTACT US
No Result
View All Result
  • HOME
  • BLOGS
  • CHAKRAS AND CHANNELS
  • NIRMAL VIDYA MANTRA
  • SAHAJA YOGA TREATMENTS
  • MY EXPERIENCE WITH SAHAJA YOGA
  • NIRMALA VIDYA
  • SHRI MATAJI PHOTOS
  • SAHAJAYOGA HINDI
  • SAHAJI POEMS COLLECTION
  • SAHAJA YOGA ARTICAL
  • WEB STORIES
  • ABOUT US
  • CONTACT US
No Result
View All Result
No Result
View All Result

आत्मसाक्षात्कार के बाद इंसान क्यों बदल जाता है ?

in SAHAJAYOGA HINDI
Share on FacebookShare on TwitterShare
Shri Ganesha Puja, 25 September 1999, Cabella

आत्मसाक्षात्कार के बाद इंसान ईश्वर द्वारा। उदहारण के लिए, अगर मैं सिर्फ अपने सिर को जानती हूं तो काफी नहीं है। अगर मैं सिर्फ अपनी गर्दन को जानती हूं तो काफी नहीं है। अगर मैं सिर्फ अपने पैरों को जानती हूं तो काफी नहीं है। लेकिन जितना अधिक मैं स्वयं के विषय में जानूंगी उतनी ही मैं गतिशील बन जाऊंगी, उतनी ही मै विस्तृत हो जाऊंगी।

विश्व को जोड़ने वाली शक्ति — दिव्य प्रेम

और जो कुछ महान था, या वो सारे लोग जिन्हें महान कहा गया, वह इसलिए महान हैं क्योंकि वे बहुत लोगों में रहते हैं। मुझे वातावरण में वो गर्मजोशी महसूस होती है, जैसे आप अनुभव कर रहे हैं क्योंकि आप जानते हैं वो (सहज योगी) विदेशी नहीं हैं, वो आप के भाई बहन हैं। पुराणों में ऐसी कई कथाएं हैं की, मैं उसका नाम नहीं लूंगी, लेकिन एक बार दो भाई जंगल में मिले। पर वह सोचते थे कि वो दुश्मन हैं और वो आपस में लड़ना चाहते थे।

जब वो एक दूसरे को मारने के लिए आए वो एक दूसरे पर प्रहार नहीं कर पाए। फिर उन्होंने अपने तीर निकाल लिए पर तीर चले ही नहीं। इस बात से वे बहुत आश्चर्यचकित हुए, और जब उन्होंने एक दूसरे से पूंछा, ‘तुम्हारी मां कौन है’? उन्हें पता चला कि उनकी मां एक ही हैं। और तब उन्हें पता चला कि ना तो वो विदेशी हैं, ना शत्रु हैं पर वे एक ही मां का अंश हैं।

इस ज्ञान ने उन्हें कितनी मधुरता और सौंदर्य प्रदान किया!! और कितनी सुरक्षा कि भावना इस समझ से आती है, कि सारे विश्व में सब जगह हमारे भाई बहन हैं जो अपने अंतर के तत्व पर हैं,जिन में दिव्यता है और किस प्रकार हम उस प्रेम से आपस में बंधे हैं।

जब मै प्रेम की बात करती हूं तो लोग सोचते हैं मैं आप को कमजोर बनाने का प्रयत्न कर रही हूं, क्योंकि लोगों सोचते हैं कि जो प्रेम करते हैं वो कमजोर होते हैं। परंतु इस संसार में को सब से गतिशील शक्ति है वह प्रेम की है। जो सब से प्रबल शक्ति है वह प्रेम की ही शक्ति है। यहां तक ​​कि हम जब प्रेम में कष्ट उठाते हैं, वह अपनी शक्ति के कारण हम कष्ट उठाते हैं, ना कि अपनी कमजोरी के कारण।

शांत व्यक्ति ही सबसे शक्तिशाली होता है

उदहारण के तौर पर, चीन में एक अध्यापक था जो मुर्गों को सिखाता था कि लड़ना कैसे है। और वहां का राजा अपने मुर्गों को उस अध्यापक केे पास ले गया और उस से कहा, ‘कृपया आप इनको युद्ध करना सिखा दीजिए।’ एक महीने के बाद जब राजा उन मुगों को अपने साथ लाने के लिए गया, उसे आश्चर्य हुआ कि मुर्गे एक दम शांत थे, कुछ भी नहीं कर रहे थे। और उस ने अध्यापक से कहा, ‘तुम ने मेरे मुर्गों को क्या कर दिया है? ये तो बिल्कुल भी आक्रामक नहीं हैं। यह तो कुछ भी नहीं कर रहे हैैं।

ये कैसे लड़ेंगे? एक दौड़ का आयोजन होना है। इनकी शक्ति का प्रदर्शन होना है, अब हम इस बारे में क्या करेंगे?’ अध्यापक ने कहा,’आप‌ बस इन्हे ले जाइए।’ वो उन दोनों मुर्गों को अपने साथ ले गया और अखाड़े में खड़ा कर दिया जहां और भी मुर्गे थे जो लड़ाई के लिए आए थे।

ये दोनों मुर्गे बहुत इत्मीनान से खड़े थे। बाकी सभी मुर्गे उन्हें उकसाने और सताने लगे। ये सिर्फ खड़े थे और उन्हें निहार रहे थे। बाकी सब मुर्गे उनके व्यवहार से चकित थे और सोचने लगे ये बहुत शक्तिशाली है और वह सब भाग गए।

जिस प्रेम की मैं बात कर रही हूं, वो दिव्य प्रेम, ना सिर्फ आप को ताकतवर, बल्कि गतिशील भी बनाता है। ये सब से बड़ी ज्योतिर्मय शक्ति है जिसके बारे में हम सोच सकते हैं! सिर्फ जब प्रेम स्थूल से घिरा होता है और स्थूल में खो जाता है, ऐसा लगता है जैसे वो कमजोर है और ‘जंजीरों में बंधा ‘ है। जिस वक़्त वो आजाद होती है, यह गतिशील शक्ति दुनिया कि सब शैतानी शक्तियों से ऊंची निकल जाती है।

दुनिया को बचाने के लिए जागो

जब लोगों को आत्म साक्षात्कार मिलता है, अहंकार स्वत: छूट जाता है, काफी हद तक, मैं कहूंगी। क्योंकि आप कहते हैं की चैतन्य जा रहा है, आप ये नहीं कहते की आप चैतन्य दे रहे हैं। अहंकार की छूट जाने से कभी कभी ऐसा होता है कि आप को लगता है, जो कुछ आप पाना चाहते थे आप ने पा लिया और अब आप को इस बारे में बात नहीं करनी चाहिए। जब कहीं से कोई विरोध होता है, आप इसे चुप करा देते हैं और उस से दूर बैठ जाते हैं।

आप किसी नकारात्मक विरोधी के विरोध का सामना नहीं करना चाहते, चाहे वह बोलने से हो या चाहे दुष्ट तरीकों से हो। हम उस से दूर भागते हैं सोचते हुए, हे प्रभु! हम उसका सामना कैसे करेंगे?

इस की बिल्कुल उलट जो व्यक्ति नकारात्मक होता है, जिस के अंदर घृणा है (inaudible) जैसा कहा जाता है, यानी ऐसा व्यक्ति जो बड़बोला होता है। ऐसा व्यक्ति बातें करता है, बड़ी बड़ी बातें। ऐसा व्यक्ति सोचता है कि वह सब लोगों से बेहतर है और सारी दुनिया को बेवकूफ बना सकता है।

वो अपने ऊपर जिम्मेदारी ले लेता है। वो एक आश्रम या कोई बड़ा स्थान शुरू करता है जहां वह अपना सारा अज्ञान ले कर बैठता है और और अपना तथाकथित ज्ञान लोगों में वितरित करने लगता है।

उसके तरीकों से लोग प्रभावित होते हैं और वो सब जा कर उसके चरणों में गिर जाते हैं। जबकि आत्मसाक्षात्कारी व्यक्ति घर में चुपचाप बैठता है यह आश्चर्य करते हुए की यह मूर्ख क्या कर रहे है?

पर अब वह वक़्त नहीं की आत्मसाक्षात्कारी बैठ कर सोचे, आश्चर्यचकित हो और ऐसे लोगों की मूर्खता पर हंसे जो अभी आत्मसाक्षात्कारी नहीं है। उन पर दया भी नहीं करनी है पर बाहर आना है, बाहर आना है प्रेम की तलवार ले कर सारे विश्व को जीतने के लिए। यह परम आवश्यक है। अगर प्रभु की रचना को बचाना है तो हम इस विषय में चुप नहीं बैठ सकते। प्रेम के विषय में जो गलत धारणा है और जो झूठ है सब को त्यागना चाहिए।

आप को पता होना चाहिए कि यह एक गतिशील शक्ति है, और वो शांति और परमानंद उठाने के लिए, आप को आराम से अपने साथ बैठने नहीं देगी, जब की बाकी दुनिया इस का आनंद नहीं उठा रही है, उन दुष्ट प्रभावशाली लोगों के हाथों का खिलौना बन चुकी है जो इस दुनिया में तबाह करने की लिए और शैतानी राज्य लाने को धरती पर लाने के लिए आए हैं।

आत्मसाक्षात्कार के बाद आप कभी अकेले नहीं होते

Public program, 18 December 1998, Delhi

अब वो वक्त चला गया है जब लोगों को कष्ट उठाने पड़ते थे। प्रभु ईसा मसीह ने हमारे लिए बहुत कष्ट उठाए। बेशक इसा मसीह ने कभी कष्ट नहीं सहा क्योंकि उनको कोई कष्ट नहीं होता। वह कभी रोए नहीं। वह उन मुर्गों की तरह थे, एक बहुत ही शक्तिशाली व्यक्त्तिव वाले। परन्तु आज वह दिन है जब आप को अपने अंदर जो शक्ति है उसके प्रति अपनी समझ को चमकाना होगा। जो स्थूल हैं उन्हें अपनी असुरक्षा, अपनी समस्याएं, अपनी संस्था के बारे में चिंता करनी चाहिए लेकिन उन को नहीं जो आत्मसाक्षात्कारी हैं।

मैंने आप को कई बार बताया है और आज इन्होंने भी ये टिप्पणी की, आप को पता होना चाहिए की आप कभी अकेले नहीं होते जब आप एक आत्मसाक्षात्कारी होते हैं। ऐसे बहुत से लोग हुए हैं जो आत्मसाक्षात्कारी थे, आप के जन्म लेने से पहले भी, जो मौजूद हैं, जो हर क्षण आप की सहायता करने के लिए उत्सुक हैं।

हमारे शास्त्रों में उन्हें चिरंजीव कहते हैं, आप उन्हें जानते हैं। ये वह व्यक्ति हैं जो निरंजन हैं। जैसे इन्होने भैरव और हनुमान के बारे में कहा, ये सब लोग मौजूद हैं, और वह सब आप की एक पुकार का इंतजार कर रहे हैं।

एक बार हम बाज़ार गए थे और वहां किसी बात को ले कर कोई समस्या अा गई और मेरे साथ कोई था, एक शिष्य, वह भी मेरे साथ था। मैं बस देखना चाहती थी उसकी क्या प्रतिक्रिया होगी। वो एक व्यक्ति से बहस कर के उस को किसी चीज के बारे में बताने का प्रयत्न करने लगा। तो उस ने मुझे बताया,’ माताजी अब हमे चलना चाहिए। जब हम दुकान से बाहर आए, मैंने कहा, तुम इस बारे में क्या करोगे? उसने कहा, मैंने तो पहले ही हनुमान को यह बात सम्हालने के लिए कह दिया है। और वह काम हो गया!! यह स्थूल है, लेकिन ये होता है।

जब वो हार जाते हैं (वे अर्थात आप लोग) तो उन में (अर्थात देवदूतों) से किसी पर भी आप छोड़ सकते हैं, और उन्हें यह हर हाल में करना ही होगा। क्योंकि आप है जो रंगमंच पर हैं, वो नहीं। वे पृष्ठभूमि के लोग हैं। वे पार्श्व हैं। लेकिन आप को अपना मुंह खोलना होगा,नहीं तो अगर वो सोचने लगे तो लोग क्या कहेंगे? वे हर तरह से आप की मदद करेंगे, लेकिन आप कहां तक अपनी सुरक्षा पर खड़े हैं? आप कहां तक अपनी संपत्ति पर खड़े हैं, अपने बारे में अपनी समझ पर खड़े हैं?

एक महायुद्ध चल रहा है।आप इसके बारे में नहीं जानते। आप में से कुछ जानते है, आप में से कुछ को पक्के तौर पर जानकारी है इसकी, क्योंकि उनके पास युद्ध करने का अनुभव है। एक बड़ा युद्ध चालू है। विशेषकर जब दस राक्षसों ने अवतार लिया है और आप अभी इतने कमजोर हैं। आप अभी भी निसंदेह छोटे बच्चे हैं, क्योंकि आप को कुछ दिन पूर्व ही अपना आत्म साक्षात्कार मिला है। लेकिन अगर आप चाहें, आप बहुत जल्दी बढ़ सकते हैं।

आप बहुत बड़े बड़े दिग्गज बन सकते हैं। आप सब बढ़ सकते हैं। सिर्फ आप को निर्णय लेना है कि आप को अंदर से विकसित होना है। ऐसी बहुत सी चीजें है जो आप ने ही खोजी हैं, जिस से एक इंसान विकसित होता है। मै आप को भोजन दे सकती हूं, लेकिन आप को खुद ही विकसित होना होगा।

नकारात्मकता को पहचानो और प्रेम से बदलो

जहां भी आप नकारात्मकता को देखते हैं तो आप को खड़े हो कर कहना होगा, ‘ये और कुछ नहीं नकारात्मकता है, चाहे आप इसे पसंद करें या ना करें। इस में आप उस व्यक्ति से प्रेम करते हैं, आप नफरत नहीं करते। सिर्फ मीठी बातें करना ही प्रेम की अवधारणा नहीं है। नहीं, एक मां कभी कभी बच्चे को डांटती भी है। इसका अर्थ यह नहीं कि वह बच्चे से प्यार नहीं करती। अगर आवश्यक है, तो तो आप को उस व्यक्ति को बताना है कि ये नकारात्मकता है।

निस्संदेह, अगर वह व्यक्ति आत्मसाक्षात्कारी हैं वह सुधार की बात का का बूरा नहीं मानेगा, क्योंकि वो सुधार चाहता है, वह जानता है कि इस को सही करना चाहिए। यंत्र को ठीक करना चाहिए। लेकिन एक व्यक्ति जो समझता नहीं है, आपको प्रेम की शक्ति का प्रयोग करना होगा उस पर।

आप प्रेम से उसे ठीक कर सकते है, ये आप जानते है, यहां बैठे बैठे। कई लोगों ने कुछ लोगों को प्रेम से ठीक करने का प्रयास किया है जो शैतानियां करने का प्रयास कर रहे थे और उन्होंने बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त करने में सफल रहे। वो लोग पलट गए और वापस लौट आए हैं। सिर्फ अपने हाथ और अपना चित्त उस व्यक्ति की तरफ करने से, इस हाथ को ऐसे घुमाने से, प्रेम उसे घेर लेता है और वह व्यक्ति वापस अा जाता है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि नकारात्मकता और सकारात्मकता हैं, इनके बीच कुछ नहीं। यह जरूर याद रखना चाहिए। दोनों के बीच कोई समझौता नहीं है। या तो रोशनी और अंधेरा है, या सकारात्मक और नकारात्मक है, निश्चित रूप से दो चीजें हैं जो लड़ रही हैं। -सिर्फ आप की इच्छा, यही तो मुश्किल है सारे मज़ाक के साथ!! आप की इच्छा का सम्मान होता है। आप की इच्छा का सदैव सम्मान होता है, अगर आप की इच्छा एक दिग्गज बनने की है जो प्रेम करता है, तो आप हो सकते हैं।

कुछ दिन पहले मैं एक मनोचिकित्सक से मिली और उसके प्रति अहंकार में बहुत अधिक पकड़ अा रही थी। मैंने कहा, आप को क्या हुआ है? उस ने कहा, मेरा बचपन। मेरे बचपन में मुझे ज्यादा प्यार नहीं मिला। मैंने कहा, अब मैं यहां हूं। मेरी गोद में अा जाओ और मेरा प्यार लो। उस ने कहा, मैं अपना प्रेम प्रवाहित करना चाहता हूं। मां मैं खुद को खोल देना चाहता हूं पूर्णत: बिना किसी भय के। मैंने कहा, आप सिर्फ शुरू कर दो, यह चिंता मत करो कि लोग गलत समझेंगे, लोग क्या कहेंगे।

ये कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है कि ये लोग क्या कहेंगे। प्यार के लिए प्यार ही संतोषदायक है, की आप दूसरे व्यक्ति से प्यार करते हैं। आप सिर्फ अपना प्रेम बहाएं, मैंने कहा तुम देखोगे की यह कार्यान्वित होगा। बस निर्णय करो कि ‘मैं लोगों से प्यार करूंगा ‘ और एक बार आप यह तय कर लें, सारा स्वर्ग, सारे स्वर्ग की शक्ति आप के चरणों में गिर जाएगीI इस में आप मुझ पर विश्वास करें।

आत्मसाक्षात्कार के बाद आपकी जिम्मेदारी क्या है?

वैसे अगर आप देखें तो मैं एक साधारण गृहिणी हूँ! कुछ लोग हमेशा कहते हैं,’ माताजी, हम आप के जैसे कैसे हो सकते हैं?’ क्यों नहीं? मैं आप जैसी ही हूं! मेरी भी वही समस्याएं हैं जो आप की हैं। बस फर्क इतना है की मैं जानती हूं कि मैं और कुछ नहीं उस प्रेम का अवतरण हूं जो दिव्य है और उसके बिना मेरा अस्तित्व नही है। मेरे जीवन के हर क्षण में, बस प्रेम ही बहे, बस प्रेम ही बहे। मेरी मस्तिष्क की हर लहर प्रेम प्रसारित करती है। और ये आप को पूर्णतः शक्तिशाली बनाता है।

अगर आप पंढे, मै देवी महात्म्य पढ़ रही थी उस में वे एक राक्षस कि बात करते हैं जिसका सामना आदिशक्ति से हुई, दिव्य माता से हुई, और वो उन पर हंसने लगा, ‘तुम स्त्री, तुम मेरे साथ क्या कर सकती हो? तुम तो एक नारी हो। तुम क्या कर सकती है मेरे साथ?’ वेे उसको देख कर मुस्कुराईं,’ ठीक है! चलो, साथ चलो, देखते हैं! और एक झटके में उन्होंने उसका गला काट दिया। बिल्कुल साफ साफ यह दर्शाता है कि सकारात्मकता नकारात्मकता का गला काट सकती है।

इस में कोई हिंसा नहीं है। आप को उन दोनों के बीच का फर्क याद रहना चाहिए। अगर नकारात्मकता काट दी जाती है और सकारात्मकता को बाहर लाया जाता है, यह सब से बड़ी अहिंसा है जो आप किसी के साथ कर सकते हैं। आप ने देखा है की नकारात्मकता लोगों के साथ क्या करती है, नकारात्मकता क्या है आप ने नहीं जाना है। आप ने देखा है की किस प्रकार भूत बाधित मनुष्य कष्ट उठाते हैं।

और यहां, वह प्रेम प्राप्त करने के लिए आतुर रहते हैं और ये जानकर आप को आश्चर्य होगा कि अगर आप उन से सच में प्रेम करते हैं वह स्वयं मेरे पास आते हैं और कहते हैं, मां! हमें मुक्ति दीजिए’। वह मेरे पास सिर्फ इसलिए आते हैं, कभी आप के साथ, की मैं उन्हें मुक्ति दूं। और अगर में यह वादा करती हूं, वह फिर से जन्म लेते हैं। लेकिन ये हैं। लेकिन ये राक्षस हैं।

जैसा कि मैंने आप को बताया था कुछ दिन पहले, की कलियुग ने एक सुंदर मंच आप के सामने रखा है और एक नाटक का मंचन हो रहा है, जिस में रावण को सीता जी को मां की तरह प्रेम करना है, कंस को राधा के चरणों में गिरना है। शायद आप यह नहीं जानते, की कृष्ण कंस को मारना चाहते थे। उस समय वह उनका मामा था। तो फिर उनके अंदर यह भावना आयी, अपनी माता की, (की वह कहेंगी) की आखिर वह मेरा भाई है।

तो उन्होंने राधा से कहा और राधा ने कंस को मारा- वह राधा जो उस समय सारे सारी दुनिया से प्रेम करती थीं। वह प्रेम का अवतरण हैं और उन्होंने कंस को मारा, क्योंकि ऐसा होना था। जब आप प्रभु के हाथों में खेल रहे होते हैं, तब अगर वह किसी को मारना चाहते हैं, उसे मारना होता है। लेकिन सर्वप्रथम आप को पूर्णतः परमात्मा के हाथों में होना चाहिए। यह उनका प्रेम ही है जो इस देह को मारता है।

और जब उनकी शक्ति और विजय के गीत गाए जाते हैं, आप ने देखा है, मेरे सारे चक्र, किस प्रकार वे काम करने और स्पंदित होने लगते हैं। क्योंकि उन विजयी दिनों के शक्ति अभी भी छाई हुई है और ये आप के द्वारा कार्यान्वित होगी। लेकिन आप के इस बिचारे यंत्र का क्या, जो थोड़ा धीरे चल रहा है? इस समय, जब प्रेम को राज करना है, सतयुग, अगर उसे आना है, उसे आप के प्रयासों से आना है अब। सहज योग से पहले कोई प्रयास नहीं।

लेकिन अब आप के सारे प्रयास दिव्य हैं। जो भी आप करते हैं, जो भी अनुकंपी तंत्रिका तंत्र (sympathetic nervous system) आप जाग्रत करते हैं, वह आप को परानुकंपी नाड़ी तंत्र (parasympathetic nervous system) से मिलता है। आप कुछ भी नहीं करते हैं। लेकिन आप खुद ही देख सकते है कि क्या दांव पर लगा है ।

आप चुने हुए लोग है, नहीं तो ऐसा क्यों है कि केवल आप ही वह लोग हैं जिनको आत्म साक्षा्कार मिला और आप ही इतना आगे आए हैं? आप में से कुछ को तो थोड़े समय पहले ही मिला है और आप बहुत आगे चले गए हैं। क्यों? आप चुने हुए लोग हैं और आपको अपने ऊपर जिम्मेदारी लेनी होगी की आप उस दिव्य प्रेम और गतिशील शक्ति का यंत्र बने जो कि घृणा की अवधारणा को परिवर्तित करेगी जिस पर सारे देश और सब मतभेद निर्मित किया गए है।

अपने अंदर की शक्ति को पहचानो

कभी कभी ऐसा लगता है, कैसे? ऐसा कैसे ही सकता है? लेकिन अब गोकुल के दिन नहीं रहे। मैं उस बारे में सोच रही थी। उस समय के बारे में जब कृष्ण अपनी मुरली बजाते थे और उन्होंने अपना सहज योग गोपियों और गोपों को देने का प्रयास किया। ओह! हम अलग अलग जीवन में प्रयत्न करते रहे, करते रहे, करते रहे। कुछ नहीं हुआ। और अब यह एक चिंगारी की तरह चटकने वाला है। फिर एक श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू हो जाएगी। पर इस कार्य को करने के लिए हमारे पास शक्तिशाली यंत्र होने चाहिए वरना फ्यूज उड़ जाएगा।

सिर्फ आप के अंदर जो शक्ति है उसका अहसास आप के चित्त को होना चाहिए। आप को सिर्फ यही काम करना है, अपने चित्त को महसूस करना, और वह सब जो असत्य है उसे त्याग देना। वह सब जो असत्य है आप अपने अंदर देखेंगे आप जान जाएंगे असत्य क्या है, बस इसे त्याग दें। सिर्फ सत्य को स्वीकार करें, और वो सत्य आप को असली यंत्र बनने, प्रेम का बल बनने और इस धारा को आगे ले जाने की शक्ति देगा। इस का अर्थ ये नहीं कि आप अहंकारी हो, आप हो नहीं सकते अगर आप प्रयत्न भी करें। आप किसी को क्षति नहीं पहुंचा सकते अगर आप चाहें भी तो।

आप में से कई ने ये व्यक्त किया है कि, माताजी आप इसे हर ऐरे-गेरे नत्थू- खैरे को दे रही है। मैं किसी ऐरे-गेरे नत्थू- खैरे को नहीं दे सकती। वह ऐसा पुरुष होना चाहिए जो खोज रहा हो, वह एक ऐसी नारी होनी चाहिए जो खोज रही हो, जो अपने पूर्व जीवनों में खोजते रहे हों। आप को जानना चाहिए कि आपको जो कुछ भी मिला है, वह आप को अपने अधिकार के कारण मिला है। तो एक व्यक्ति ऐरा- गैरा, नत्थू – खैरा जैसा दिख सकता है, पर वह है नहीं, वह एक महान संत है।

यहां सब संत बैठे हुए हैं। यह धर्माशीलता का केंद्र और बीर्जकेंद्र है जहां से सम्पूर्ण दिव्यता बह रही है। केवल एक चीज है, इसे आप से बाहर की और बहने दीजिए। यह शक्ति परमात्मा की है और और इसकी चिंता करना आप की जिम्मेदारी नहीं की ये अच्छा करेगी या बुरा। अगर आपको लगता है कि दुनिया के नैतिक विज्ञान के अनुसार, वह कुछ बुरी चीजें कर सकती है, तो भी अंतत: यह ठीक होने वाला है।

उस जरासंध को क्यों मारना पड़ा? कंस को क्यों मारना पड़ा? रावण को क्यों मारना पड़ा? बेशक हत्या ज्यादा मदद नहीं करती, मैं समझ गई हूं, क्योंकि जो सब लोग मारे गए थे वापस आ गए हैं अपने स्थान पर। फिर भी, आप इन भयानक लोगों से मत लड़िए। तुम बस अपने आप से लड़ो। आप सिर्फ खुद को देखिए। आप कहां हैं? आप क्या कर रहे हैैं? तुम परमात्मा पर हो या स्थूल पर? जरा इस पर विचार कीजिये, हर पर, हर पल आप ध्यान में हैं।

सिर्फ उस पल के बारे में सोचो और इस पल की गतिशीलता के बारे में सोचो। ये सम्पूर्ण शक्ति जो हर पल को भर रही है, सिर्फ आप के अंदर जाने के लिए। वह आपके सहस्त्रार से होकर बहेगी आप के अंतर में और पूरी तरह से आपके अस्तित्व के चारों ओर घूम कर आप के अंतर को पूर्णत: चैतन्य शक्ति एक पूर्ण दिव्य शक्ति में परिवर्तित करती हैं। उसे अंदर आने की इजाजत दीजिए, स्वीकार कीजिए, स्वीकार कीजिए बिना किसी भय के। उसे अंदर आने दीजिए। हर पल, हर पल जाग्रत रहिए।

यह एक बहुत अनिश्चित समय है जिस में हम हैं। मेरे पास दो ही हाथ है, ये आप बहुत साफ देख सकते हैं। और जबकि श्री (भाषण में से व्यक्ति का नाम संपादित कर दिया गया है ) कहते हैं कि मैं सब कुछ कर सकती हूं। मैं सब कुछ कर सकती हूं लेकिन आप से कुछ करवा नहीं सकती। आपकी इच्छा का पूरे समय सम्मान लिया जाएगा।

हर बात को संभाला जा सकता है सिवाय एक के, कि आप को एक श्रेष्ठ यंत्र, एक श्रेष्ठ माध्यम, एक श्रेष्ठ बांसुरी बनना है मेरे प्रभु के लिए, की प्रेम की धुन बज सके। यह आप का काम है कि आप अपने सातों चक्तों कि सफाई करें। यह आप का काम है कि अपने खालीपन की सफाई करें और अपने अंदर सम्पूर्ण हो। और वो अपना कार्य जानते हैं।

वो कलाकार हैं। लेकिन आप यंत्र हैं। और इतनी सारी आत्माओं से बहता सामंजस्यपूर्ण संगीत इन दुष्ट लोगों के कान भर सकता है और उनके हृदय को भेद सकता है और उनमें प्रेम भर सकता है और शायद वह खुद ही अपने दुष्ट कार्यों को त्याग देंगे और प्रेम के चरणों में गिर पड़ेंगे।

आज कृष्ण का आप के अंदर जन्म होना है।एक पांच साल का लड़का कालिया (एक राक्षसी नाग जो यमुना नदी में रहता और उस से नदी का पानी जहरीला हो गया था) को मारने गया। उस कृष्ण का आप के अंदर जन्म होना है। कृष्ण गए और कालिया के सहस्त्रार पर बैठ गए और अपने पैरों से उसे दबा रहे थे, और सब लोग कृष्ण का कालिया के सहस्त्रार पर नृत्य का ये महान नाटक देख रहे थे। कृष्ण को तुम्हारे भीतर पैदा होना है। जब आप कृष्ण होंगे आप देख नहीं पाएंगे।

आइए अब हम उस अवस्था में चले जो शब्दों से परे है, विचारों से परे है, निर्विचारिता के दायरे में जहां परमात्मा अपना आशीर्वाद बरसा रहे हैं। इन लोगों से आज पूजा करने का निर्णय लिया है, और आप जानते हैं मुझे क्या होता है, जब आप मेरी पूजा करते हैं। तो, वह सारी समस्याएं के साथ, जिनका हम बाद में सामना करेंगे, मैं चाहूंगी कि आप सब पूजा में पूरा ध्यान दें, और उसका पूरा लाभ उठाएं।

इस पूजा से शुरुआत के लिए आप को मां की सुरक्षा प्राप्त होती है। और जब मेरे चक्र घूमना शुरू करते हैं वह आप को प्रेम की विशेष शक्तियां प्रदान करते हैैं, आप के चक्रों को आशीर्वादित करते हैं और उन्हें पूर्णत: भर देते हैं।

Reference : – 1973-0828

आत्मसाक्षात्कार के बाद क्या करें और क्या नहीं || Shri Mataji Speech

Continue Reading

Related Posts

सामूहिक अचेतन और चेतना का रहस्य

सामूहिक अचेतन और चेतना का रहस्य

जेट युग का भ्रम

जेट युग का भ्रम और कुंडलिनी का सत्य

चेतना और परमात्मा की भूमिका

चेतना और परमात्मा की भूमिका

स्वाधिष्ठान चक्र का तत्व

स्वाधिष्ठान चक्र का तत्व

आत्म साक्षात्कार और शुद्धि शक्ति

आत्म साक्षात्कार और शुद्धि शक्ति

Divya Bachchon Ka Sahi Margdarshan

Divya Bachchon ka Sahi Margdarshan

ABOUT US

This website born from desire to share the experience of the sahajyog Meditation with our brothers and sisters from all around the world.

Our main purpose is to go deeper and deeper in the sahajyog meditation, to reach the state of complete experience of our spirit

MAIN MENU

  • HOME
  • BLOGS
  • CHAKRAS AND CHANNELS
  • NIRMAL VIDYA MANTRA
  • SAHAJA YOGA TREATMENTS
  • MY EXPERIENCE WITH SAHAJA YOGA
  • NIRMALA VIDYA
  • SHRI MATAJI PHOTOS
  • SAHAJAYOGA HINDI
  • SAHAJI POEMS COLLECTION
  • SAHAJA YOGA ARTICAL
  • WEB STORIES
  • ABOUT US
  • CONTACT US

Recent Posts

  • आत्मसाक्षात्कार के बाद इंसान क्यों बदल जाता है ?
  • सामूहिक अचेतन और चेतना का रहस्य
  • जेट युग का भ्रम और कुंडलिनी का सत्य
  • चेतना और परमात्मा की भूमिका
  • स्वाधिष्ठान चक्र का तत्व
  • HOME
  • About us
  • Contact us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer

© 2025 DIVINE SAHAJYOG - Sahajyog meditation By Shri Mataji.

Copyright © DIVINE SAHAJYOG 2023
No Result
View All Result
  • HOME
  • BLOGS
  • CHAKRAS AND CHANNELS
  • NIRMAL VIDYA MANTRA
  • SAHAJA YOGA TREATMENTS
  • MY EXPERIENCE WITH SAHAJA YOGA
  • NIRMALA VIDYA
  • SHRI MATAJI PHOTOS
  • SAHAJAYOGA HINDI
  • SAHAJI POEMS COLLECTION
  • SAHAJA YOGA ARTICAL
  • WEB STORIES
  • ABOUT US
  • CONTACT US

© 2025 DIVINE SAHAJYOG - Sahajyog meditation By Shri Mataji.